• All types of bhakti bhajan, aarti, chalisa etc. available here.

    Saturday, July 27, 2013

    कृष्ण जी की आरती

    आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

    गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला ।
    श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला ।

    गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली ।
    लतन में ठाढ़े बनमाली;
    भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक;
    ललित छवि श्यामा प्यारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की…

    कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं ।
    गगन सों सुमन रासि बरसै;
    बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग;
    अतुल रति गोप कुमारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की…

    जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा ।
    स्मरन ते होत मोह भंगा;
    बसी सिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच;
    चरन छवि श्रीबनवारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की…

    चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू ।
    चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू;
    हंसत मृदु मंद,चांदनी चंद, कटत भव फंद;
    टेर सुन दीन भिखारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की…

    No comments:

    Post a Comment

    Fashion

    Beauty

    Travel