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    Saturday, July 27, 2013

    बद्री नाथ जी की आरती

    पवन मंद सुगंध शीतल हेम मंदिर शोभितम |
    निकट गंगा बहत निर्मल श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम |
    शेष सुमिरन करत निशदिन धरत ध्यान महेश्वरम |
    शक्ति गौरी गणेश शारद नारद मुनि उच्चारणम |
    जोग ध्यान अपार लीला श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम |
    इंद्र चंद्र कुबेर धुनि कर धूप दीप प्रकाशितम |
    सिद्ध मुनिजन करत जै जै बद्रीनाथ विश्व्म्भरम |
    यक्ष किन्नर करत कौतुक ज्ञान गंधर्व प्रकाशितम |
    श्री लक्ष्मी कमला चंवरडोल श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम |
    कैलाश में एक देव निंरजन शैल शिखर महेश्वरम |
    राजयुधिष्ठिर करतस्तुति श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम |
    श्री बद्री जी के पंच रत्न पढ्त पाप विनाशनम |
    कोटि तीर्थ भवेत पुण्य प्राप्यते फलदायकम |

    जय जय श्री बद्रीनाथ, जयति योग ध्यानी || टेक ||

    निर्गुण सगुण स्वरूप, मेधवर्ण अति अनूप |
    सेवत चरण स्वरूप, ज्ञानी विज्ञानी | जय...

    झलकत है शीश छत्र, छवि अनूप अति विचित्र |
    बरनत पावन चरित्र, स्कुचत बरबानी | जय...

    तिलक भाल अति विशाल, गल में मणि मुक्त-माल |
    प्रनत पल अति दयाल, सेवक सुखदानी | जय....

    कानन कुण्डल ललाम, मूरति सुखमा की धाम |
    सुमिरत हों सिद्धि काम, कहत गुण बखानी | जय...

    गावत गुण शंभु शेष, इन्द्र चन्द्र अरु दिनेश |
    विनवत श्यामा हमेश, जोरी जुगल पानी | जय...

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