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    Saturday, July 27, 2013

    संतोषी माता की आरती

    जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता ।
    अपने सेवक जन को, सुख संपति दाता ॥ जय…

    सुंदर चीर सुनहरी, मां धारण कीन्हो ।
    हीरा पन्ना दमके, तन शृंगार लीन्हो ॥ जय…

    गेरू लाल छटा छवि, बदन कमल सोहे ।
    मंद हँसत करुणामयी, त्रिभुवन जन मोहे ॥ जय…

    स्वर्ण सिंहासन बैठी, चंवर ढुरे प्यारे ।
    धूप, दीप, मधुमेवा, भोग धरें न्यारे ॥ जय…

    गुड़ अरु चना परमप्रिय, तामे संतोष कियो।
    संतोषी कहलाई, भक्तन वैभव दियो ॥ जय…

    शुक्रवार प्रिय मानत, आज दिवस सोही ।
    भक्त मण्डली छाई, कथा सुनत मोही ॥ जय…

    मंदिर जगमग ज्योति, मंगल ध्वनि छाई ।
    विनय करें हम बालक, चरनन सिर नाई ॥ जय…

    भक्ति भावमय पूजा, अंगीकृत कीजै ।
    जो मन बसे हमारे, इच्छा फल दीजै ॥ जय…

    दुखी, दरिद्री, रोगी, संकटमुक्त किए ।
    बहु धन-धान्य भरे घर, सुख सौभाग्य दिए ॥ जय…

    ध्यान धर्यो जिस जन ने, मनवांछित फल पायो ।
    पूजा कथा श्रवण कर, घर आनंद आयो ॥ जय…

    शरण गहे की लज्जा, राखियो जगदंबे ।
    संकट तू ही निवारे, दयामयी अंबे ॥ जय…

    संतोषी मां की आरती, जो कोई नर गावे ।
    ॠद्धि-सिद्धि सुख संपत्ति, जी भरकर पावे ॥ जय…

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