• All types of bhakti bhajan, aarti, chalisa etc. available here.

    Saturday, July 27, 2013

    वृहस्पतिदेव जी की आरती

    जय वृहस्पति देवा, ऊँ जय वृहस्पति देवा ।
    छि छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा ॥
    तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी ।
    जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥
    चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता ।
    सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ॥
    तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े ।
    प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्घार खड़े ॥
    दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी ।
    पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी ॥
    सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो ।
    विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी ॥
    जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहत गावे ।
    जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय पावे ॥

    No comments:

    Post a Comment

    Fashion

    Beauty

    Travel